इश्क़ से इबादत तक:
निजी प्रेम से देशभक्ति तक

जो आबाद कर दूँ तुमको तो मोहब्बत समझ लेनाजो   बर्बाद कर दूँ तुमको तो   नफ़रत समझ लेना दिल दूॅंगा तुमको तो  दिल लूॅंगा  तुमसे याद रखनादिल देके दिल लूॅंगा दिल को अमानत समझ लेना सबके पास बहाना है किसी न किसी काम के नामकभी भी मिला करूॅं  तुमसे अहमियत समझ लेना हम से ज़्यादा तोContinue reading “इश्क़ से इबादत तक:
निजी प्रेम से देशभक्ति तक”

7 साल: इश्क़ नहीं, बर्बादी के!

7 साल पहले इत्तेफ़ाक से…मैं मिला उस नापाक से,बात हुई, मुलाक़ात हुई,और उसने इज़हार किया,हाँ, मैं भी हैरान था कि उसने इज़हार किया,मैंने हल्के मैं लिया बात को,हावी न होने दिया ज़ज्बात को… लेकिन उसने कहा,“मैं बाक़ी लड़कियों जैसी नहीं,धोखा देके छोड़ दूॅंगी ऐसी नहीं,तुम्हें मेरी वजह से कभी दुःख के ऑंसू न होंगे येContinue reading “7 साल: इश्क़ नहीं, बर्बादी के!”