परिस्थिति (The Scenario):
कल्पना कीजिए कि आपके सामने दो तरह के लोग हैं:
•व्यक्ति ‘A’: वह आपके लिए पलकें बिछा देता है। आपसे बात करते समय उसकी वाणी में शहद है और व्यवहार में आदर। लेकिन, जैसे ही वह आपसे दूर जाता है, वह अन्य लोगों, बेजुबान जानवरों और प्रकृति के प्रति बेहद कठोर और संवेदनहीन हो जाता है।
•व्यक्ति ‘B’: वह आपके साथ रूखा व्यवहार करता है। शायद वह आपकी उपेक्षा करे या आपसे कड़वाहट से बात करे। लेकिन, वही व्यक्ति समाज के लिए समर्पित है, सड़क पर घायल जानवर को देखकर रुक जाता है और प्रकृति का सच्चा प्रेमी है।
आपका चुनाव (The Poll):
इनमें से किसे आप ‘वास्तविक अच्छा व्यक्ति’ कहेंगे?
विकल्प 1: वह जो मेरे प्रति अच्छा है (क्योंकि मेरे लिए मेरा अनुभव सर्वोपरि है)।
विकल्प 2: वह जो सृष्टि के प्रति अच्छा है (भले ही वह मेरे प्रति बुरा हो)।
तार्किक उत्तर (The Logical Insight):
सही उत्तर: ‘B’ नामक व्यक्ति,
‘B’क्यों?
यहाँ तर्क (Logic) समझिए:
•स्वार्थ बनाम स्वभाव: व्यक्ति ‘A’ का अच्छा व्यवहार एक ‘निवेश’ (Investment) हो सकता है। वह आपसे किसी फ़ायदे की उम्मीद में अच्छा हो सकता है। उसका असली स्वभाव वह है जो वह उन लोगों या जीवों के साथ करता है जिनसे उसे कोई लाभ नहीं मिलना (जैसे जानवर या प्रकृति)।
•नैतिकता का पैमाना: किसी व्यक्ति की अच्छाई की असली परीक्षा तब होती है जब वह उनके साथ कैसा व्यवहार करता है जो उसे बदले में कुछ नहीं दे सकते।
•व्यक्तिगत मतभेद: व्यक्ति ‘B’ का आपके प्रति बुरा व्यवहार किसी ‘व्यक्तिगत कारण’ या ‘वैचारिक मतभेद’ से हो सकता है, लेकिन उसका ‘सार्वजनिक आचरण’ प्रमाणित करता है कि उसके संस्कार और उसकी आत्मा शुद्ध है।
निष्कर्ष: जो केवल आपसे अच्छा है, वह अपने स्वार्थ हेतु चतुर हो सकता है। जो पूरी दुनिया के लिए अच्छा है, वही वास्तव में चरित्रवान है।
“किसी की वास्तविकता जाननी है, तो उसे वहाॅं देखो जहाँ उसे कोई देख न रहा हो।”
