Site icon ©Jay Maartand 'Mihir'

नया जन्म ले आऊॅंगा

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(The BornFighter का सॅंकल्प)

सॅंघर्ष चाहे कितना भी रहा  मेरे जीवन में
जुझता रहा  कोई पाप न रखा मैंने मन में
नासमझ था, असहज था, मैं रूऑंसा था
क्योंकि ग्रहण लग गया था  मेरे बचपन में

मेरी अनसुनी कहानी से  लोग अंजान है
अभी गुमनाम हूॅं, मेरी न कोई पहचान है
आज भी ईमान वाला हूॅं कुछ को पता है
चाहे दुनिया में लोग कितने ही बेईमान हैं

कई लोग मिले फ़िर भी भीड़ में खोया हूॅं
कोई नहीं था सहारा  तन्हा-तन्हा रोया हूॅं
नदारद रही है नींद  मैंने ख़्वाब नहीं देखे
कैसे ख़्वाब देख लूॅं  मैं ढॅंग से न सोया हूॅं

लोगों की बातों को सुहाना सपना माना
तन्हाई में मैंने गैरों को भी अपना माना
लोग जुड़े मुझसे बस ख़ुदगर्ज़ी के लिए
मैंने परायों को भी प्राणों जितना माना

मैं वादा करता हूॅं अगर कामयाब हो जाऊॅंगा
मैं अपने जैसे लोगों के  हौसले को बढ़ाऊॅंगा
मरके रूह को  नया जिस्म मिलता है यहाॅं पे
हर बार मरके  मैं यहाँ नया जन्म ले आऊॅंगा

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