जो आबाद कर दूँ तुमको तो मोहब्बत समझ लेना
जो बर्बाद कर दूँ तुमको तो नफ़रत समझ लेना
दिल दूॅंगा तुमको तो दिल लूॅंगा तुमसे याद रखना
दिल देके दिल लूॅंगा दिल को अमानत समझ लेना
सबके पास बहाना है किसी न किसी काम के नाम
कभी भी मिला करूॅं तुमसे अहमियत समझ लेना
हम से ज़्यादा तो क़ुदरत भी अपना काम करती है
तुम ख़ुद बर्बाद हो जाओ तो क़यामत समझ लेना
सियासी गलियारों में दम घुटता है मेरे वतन का
मैं सियासत बदलने आया तो बग़ावत समझ लेना
मुझे इश्क़ है अपनी सर-ज़मीं से यह वतन है मेरा
मेरे वतन को कुछ किया तो अदावत समझ लेना
ऐ सनम क्यों जलती है इश्क़ से ये इश्क़ अलग है
इश्क़ जो सर-ज़मीं से है इसे इबादत समझ लेना
न आए मेरी कोई चिट्ठी तो काम आयेगा बलिदान
अगर कोई तोहफ़ा आया तो ख़ैरियत समझ लेना
लिखे हुए अल्फ़ाज़ के सिवा कुछ दे नहीं पाऊॅंगा
इन अल्फ़ाज़ को लिखी हुई वसीयत समझ लेना
मेरा लिखा हक़ीक़त लगे तो तसव्वुर समझ लेना
मेरा लिखा तसव्वुर लगे तो हक़ीक़त समझ लेना
पर जो बात होगी वो ख़ास बात होगी मेरे लिखे में
काम आएगी, ज़िन्दगी की ये नसीहत समझ लेना
©JAY MAARTAND ‘MIHIR’
