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•मैं शायर हूॅं, मैं हर लफ़्ज़ में रहूॅंगा•

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दिल में रहूॅंगा, जिगर में रहूॅंगा
जिधर तू रहेगी उधर मैं रहूँगा
तेरे नैन में रहूॅंगा, तेरे नक्श में रहूॅंगा
तू जहाॅं भी रहे,  तेरे अक्स में रहूॅंगा
ज़र्रे-ज़र्रे में रहूॅंगा  इस  कायनात के
मैं शायर हूॅं,  मैं  हर लफ़्ज़ में रहूॅंगा

मैं रहूँगा सब कुछ  होने पर
मैं रहूँगा सब कुछ खोने पर
चाहे आबाद रहूॅंगा
चाहे  बर्बाद रहूॅंगा
मेरे बाद  भी रहूॅंगा
तेरे बाद  भी रहूॅंगा

इधर मैं रहूँगा
उधर मैं रहूँगा
मगर  मैं रहूँगा
अमर मैं रहूँगा

रहने के लिए, मैं मोहताज़ नहीं हूॅं जिस्म का
रहने के लिए, मेरा वजूद है ख़ास क़िस्म का

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