
मैंने अपने आसपास के लोगों लोगों की एक विशेष प्रवृति का अवलोकन किया है कि ये लोग सदा उनके साथ फ़ोटो खिंचवाने के लिए लालायित रहते हैं जो लोग इन्हें नहीं जानते, या जानते हैं तो ये उनके चाटुकार होते हैं। किन्तु ऐसे लोग जिनके साथ में फ़ोटो खिंचवाना चाहिए उन्हें यह लोग योग्य नहीं मानते हैं, उन्हें ये लोग सफल और प्रसिद्ध नहीं मानते। यह एक प्रकार की मानसिक दासता या चाटुकारिता ही है। किसी सफल और प्रसिद्ध के साथ फ़ोटो खिंचवाने से कुछ नहीं होता है, हम जैसे थे वैसे ही रहते हैं। जिसे दुनिया ‘सफलता’ का नाम देती है, उसके पीछे भागती भीड़ अक्सर यह भूल जाती है कि किसी चमकते सितारे के साथ खड़े हो जाने से आपकी अपनी चमक नहीं बढ़ जाती।
मैंने अब तक केवल मोहित भाई ट्रेवलर और कुछ मित्रों के साथ ही फ़ोटो खिंचवाया है और वह भी उनकी सादगी और विनम्रता के कारण।
हमारी पहचान किसी चित्र से नहीं, हमारे चरित्र से होनी चाहिए। हमारी छवि कैमरे की अपेक्षा हम जिनसे मिलें उनकी स्मृति में होनी चाहिए। किसी अपरिचित व्यक्ति के साथ मात्र फ़ोटो खिंचवाकर गौरवान्वित होना व्यर्थ है; वास्तविक गौरव तब है जब वह व्यक्ति आपके व्यक्तित्व से परिचित हो।
किसी के साथ फ़ोटो खिंचवाकर सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर स्टेटस अपडेट करने से अधिक अच्छा यह है कि अपना स्टेटस अपग्रेड किया जाए।

“हमारी पहचान किसी चित्र से नहीं, हमारे चरित्र से होनी चाहिए।
हमारी छवि कैमरे की अपेक्षा हम जिनसे मिलें उनकी स्मृति में होनी चाहिए।
किसी के साथ फ़ोटो खिंचवाकर सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर स्टेटस अपडेट करने से अधिक अच्छा यह है कि अपना स्टेटस अपग्रेड किया जाए।”
©जय मार्तण्ड ‘मिहिर’ (Jay Maartand ‘Mihir’)
