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कैमरे की छवि या मन की स्मृति—किसे चुनें?

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आज के दौर में हम जब भी किसी सुंदर स्थान की यात्रा करते हैं या किसी उत्सव का हिस्सा बनते हैं, तो उन पलों को कैमरे में सहेजने का मोह स्वाभाविक है। मुझे भी यह पसंद है। लेकिन अक्सर मैंने गौर किया है कि जब मेरा पूरा ध्यान लेंस के पीछे होता है, तब मैं उन पलों की जीवंतता को महसूस करने से चूक जाता हूँ।

​यहीं एक द्वंद्व जन्म लेता है—कैमरे की छवि या मन की स्मृति?

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