
🎙️ आओ, सुनाऊॅं एक अनसुनी कहानी…
“The Unknown and Unheard”
The BornFighter-I: The Solar Eclipse
अध्याय (Chapter) 1: ग्रहण का आरंभ (The Beginning of the Eclipse)

The Unknown and Unheard:
The BornFighter-I |Season 1, Chapter 1, Episode 3

Episode 3
अस्पताल में दूसरा दिन: बच्चे ने अपने दादाजी के हाथ पर देखा कि नस पर सूजन आ गई है और ख़ून बह रहा है।

वह दौड़ा-दौड़ा वार्ड इंचार्ज के पास गया, वार्ड इंचार्ज को उसने कहा “ॲंकल मेरे बाबा के हाथ पर सूजन आ गई है और ख़ून निकल रहा है।”
वार्ड इंचार्ज उस बच्चे को अनदेखा करके नर्सों के साथ बातों में मगन था।

बच्चे ने जब देखा तो वह उससे सीनियर डॉक्टर के ऑफिस में जाकर सारी बात बता देता है।


सीनियर डॉक्टर दयाशंकर को जैसे ही बच्चे बताया वैसे ही वे चल दिए बच्चे के साथ और उन्होंने देखा तो वह इंचार्ज अभी भी नर्सों के साथ बतियाने में मगन था, सीनियर डॉक्टर दयाशंकर जी ने उसे डाॅंटा और बच्चे के साथ उसके दादाजी के पास गए। उन्होंने देखा तो पाया कि बच्चे के दादाजी को जो ड्रिप चढ़ाई जा रही थी उसकी सुई हाथ की नस में सही से नहीं लगी थी जिससे नस में सूजन आ गई थी और थोड़ा ख़ून भी निकल रहा था।
सीनियर डॉक्टर दयाशंकर जी ने इसे ठीक किया और चले गए।

जैसे ही सीनियर डॉक्टर दयाशंकर जी चले गए तो वार्ड इंचार्ज ने उस बच्चे को अपने पास बुलाया और उसके सिर पर स्टेथोस्कोप मार कर बोला, “अगली बार मेरे शिकायत करी न तो बुरी तरह से तेरी पिटाई करूॅंगा चल भाग अब यहाॅं से। साले न जाने कहाॅं से चले आते हैं।”

बच्चा तुरंत सीनियर डॉक्टर दयाशंकर के पास गया और उनको बताया, कि कैसे वार्ड इंचार्ज ने उसके साथ मिसबिहेव किया।

अब सीनियर डॉक्टर दयाशंकर को बहुत गुस्सा आया, वे वार्ड इंचार्ज के पास गए और उसे कहा, “यह तुम्हारे लिए लास्ट वाॅर्निंग है और तुम तो क्या कोई भी इस बच्चे को परेशान नहीं करेगा यह बच्चा वैसे ही बहुत परेशान है। इसलिए इसे कोई परेशान नहीं करेगा और अब अगर इसे परेशान किया तो परेशान करने वाले के लिए ठीक नहीं होगा।

बच्चे का साहस देखकर अन्य स्टाफ और पेशेंट के साथ संबंधियों ने उसे बच्चे की प्रशंसा की।

आज का दिन बच्चे के लिए कठिन था और उसके दादाजी भी स्वस्थ नहीं हुए थे लेकिन उसे इस बात का संतोष था कि उसके लिए सीनियर डॉक्टर दयाशंकर ने उसका पक्ष लिया और उसका साथ दिया। अब वह सीनियर डॉक्टर दयाशंकर पर भरोसा करने लगा था। उसे यह भरोसा था कि डॉक्टर दयाशंकर उसके दादाजी को ठीक कर देंगे। जैसे-तैसे दिन बीता, रात हुई और वह बच्चा अपने दादाजी के बेड के पास ही सो गया।
शेष अगले भाग में…
