•कैसे जीओगे अपने जीवन को?•

जो न समझ सके तुम मन को,मैं चला जाऊँगा यदि वन को।मेरे समान कोई साथी न होगा,कैसे जीओगे अपने जीवन को? भले तुम्हारे निकट कोई होगा,किन्तु मुझ-सा न निर्मोही होगा। भले मेरा तब से संन्यास होगा,किन्तु उसमें भी विश्वास होगा। पेड़-पौधे और प्राणी विश्वास करेंगे,तब केवल वे ही मन में वास करेंगे। किन्तु मैं रहूँगाContinue reading “•कैसे जीओगे अपने जीवन को?•”