7 साल पहले इत्तेफ़ाक से…
मैं मिला उस नापाक से,
बात हुई, मुलाक़ात हुई,
और उसने इज़हार किया,
हाँ, मैं भी हैरान था कि उसने इज़हार किया,
मैंने हल्के मैं लिया बात को,
हावी न होने दिया ज़ज्बात को…
लेकिन उसने कहा,
“मैं बाक़ी लड़कियों जैसी नहीं,
धोखा देके छोड़ दूॅंगी ऐसी नहीं,
तुम्हें मेरी वजह से कभी दुःख के ऑंसू न होंगे ये क़सम रही”,
कब तक मैं ना कहता,
मुझे भी उसकी बातों से लगा कि शायद मेरी है सनम यही…
और तब से मेरी बर्बादी की शुरुआत हुई,
मेरे पास तरक़्क़ी के बहुत मौक़े आए,
लेकिन ख़ुद के फ़ायदे के लिए वो बोली,
“छोड़कर मत जाना,
तुम बिन रह ना पाऊँगी,
मर जाऊँगी”,
अपने सपने छोड़,
तरक़्क़ी की राहों से लेके मोड़,
मैंने उसका साथ निभाया,
क़ुर्बानी से उसको क़ाबिल बनाया…
और फ़िर इक ऐसा दिन आया…
उसने दौलत के ख़ातिर किसी और से रिश्ता जोड़ दिया,
मेरा दिल तोड़ दिया और मुझे मरने की हालत में छोड़ दिया,
मैं मरीज़-ए-इश्क़ था, दाख़िल था हॉस्पिटल में,
और वो कर रही थी अय्याशी होटल में,
मैंने जिसे जान माना वो मौत सी हो गयी
और उसने मार दिया मुझे उसी पल में…
इश्क़ ना करना मेरे दोस्तों अगर ज़िन्दगी जीना चाहते हो,
इश्क़ ना करना अगर कोई मुकाम हासिल करना चाहते हो,
और फ़िर भी तुम्हे इश्क़ करना हो तो अच्छे से सोच लेना,
क्यूँ ऐसे बर्बाद होके किसी बेवफ़ा के लिए मरना चाहते हो…
ये कोई कविता या शायरी की बात नहीं,
मैंने असलियत में गुज़री हुई बात कही,
इश्क़ करके मैं बर्बाद हुआ हूँ बुरी तरह,
लगती है फ़िल्मी मग़र है ये है बात सही…
जो दुनिया की भीड़ में ख़ुद को अकेला पाते हैं, मैं यहाँ उन टूटे हुए लोगों का हौसला बढ़ाने आया हूँ,
इश्क़, प्यार, और मोहब्बत सिर्फ़ अपनी ख़ुद-ग़रज़ी के लिए करते हैं लोग, ये बात समझाने आया हूँ,
कोई और मासूम किसी ज़ालिम बेवफ़ा से इश्क़ निभाते हुए मेरी तरह बे-तहाशा बर्बाद न हो जाए,
कोई माता-पिता का सहारा है तो कोई अनाथ बेसहारा है, ऐसे मासूमों को बेवफ़ा से बचाने आया हूँ।

लेखक की कलम से (The Author’s Note)
नमस्ते दोस्तों,
मैं हूँ जय मार्तण्ड ‘मिहिर’ (Jay Maartand ‘Mihir’)।
आज जब मैं अपनी कलम उठाता हूँ, तो पीछे 8-10 साल का वो लंबा संघर्ष दिखता है जो इलेक्ट्रॉनिक्स रिटेल की चकाचौंध से शुरू होकर ख़ुद को तलाशने की इस एकांत यात्रा तक पहुँचा है।
मेरा मानना है कि हर इंसान के भीतर एक सूरज होता है, जिसे अक्सर हालातों का ग्रहण घेर लेता है। मेरी ज़िंदगी में भी वो ‘7 साल’ आए, जिन्होंने मुझे मरीज़-ए-इश्क़ बनाकर हॉस्पिटल के बिस्तर तक पहुँचा दिया। लेकिन उसी राख से जन्म हुआ ‘The BornFighter’ का।
मैं कोई बड़ा दार्शनिक नहीं हूँ, बस एक ऐसा इंसान हूँ जिसने अपनों को खोकर ख़ुद को पाया है। मैं यहाँ उन टूटे हुए लोगों का हौसला बढ़ाने आया हूँ जो दुनिया की भीड़ में ख़ुद को अकेला पाते हैं।
मेरी कहानियाँ और नज़्में महज़ शब्द नहीं, बल्कि मेरे जीवन के वो अनकहे और अनसुने (Unknown and unheard) सच हैं जो अब मेरी आने वाली किताब ‘The BornFighter’ के माध्यम से आप तक पहुँचेंगे।
“ये पंक्तियाँ महज़ एक कविता नहीं, बल्कि उस ‘सूर्य ग्रहण’ की एक झलक हैं जिसने मेरे वजूद को अंधेरे में धकेल दिया था।
7 साल की इस बर्बादी के बाद, जब जीने की कोई वजह नहीं बची थी, तब एक ऐसी कहानी का जन्म हुआ जिसे दुनिया ने अब तक न सुना है, न देखा है। ‘द बोर्नफाइटर’ (The BornFighter)—यह सिर्फ मेरी कहानी नहीं, बल्कि हर उस इंसान की दास्ताँ है जो टूटकर बिखरने के बाद फ़िर से खड़ा होना चाहता है।
यह तो बस शुरुआत है… इस तबाही के पीछे के सस्पेंस और ‘मिहिर’ के ‘बोर्नफाइटर’ बनने के सफ़र को जल्द ही आप मेरी आने वाली किताब ‘The BornFighter’ में विस्तार से पढ़ेंगे। जिसके दो भाग होंगे।
क्या आप तैयार हैं उस अंधेरे से रूबरू होने के लिए, जिसने मुझे ‘BornFighter’ बनाया?
जुड़े रहें, क्योंकि कहानी का असली पन्ना अभी पलटना बाकी है।”
मुझसे और मेरे इस सफ़र से जुड़ने के लिए आप मेरी वेबसाइट jaymaartand.com पर आ सकते हैं।
सफ़र लंबा है, पर अब मैं अकेला नहीं हूँ…
मेरी कलम मेरे साथ है।
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वेबसाइट: jaymaartand.com
लेखक: जय मार्तण्ड ‘मिहिर’ (Jay Maartand ‘Mihir’)
