वे पसीने से तरबतरसर से पाँव तलकसुकून उनके साथधूप से छाॅंव तलककई यादें उनके साथशहर से गाॅंव तलक वे मन ही मन सहते हैंहमसे न कुछ कहते हैं ये कैसा रिश्ता-नाता हैये कौन समझ पाता है दायित्वों के बोझ तलेउनकी हर शाम ढले अपने कई सपने रह जाते हैंख़ुद ढॅंग से जी नहीं पाते हैंपिताContinue reading “•पिता•”
Category Archives: नज़्म
•मैं शायर हूॅं, मैं हर लफ़्ज़ में रहूॅंगा•
दिल में रहूॅंगा, जिगर में रहूॅंगाजिधर तू रहेगी उधर मैं रहूँगातेरे नैन में रहूॅंगा, तेरे नक्श में रहूॅंगातू जहाॅं भी रहे, तेरे अक्स में रहूॅंगाज़र्रे-ज़र्रे में रहूॅंगा इस कायनात केमैं शायर हूॅं, मैं हर लफ़्ज़ में रहूॅंगा मैं रहूँगा सब कुछ होने परमैं रहूँगा सब कुछ खोने परचाहे आबाद रहूॅंगाचाहे बर्बाद रहूॅंगा मेरे बाद भीContinue reading “•मैं शायर हूॅं, मैं हर लफ़्ज़ में रहूॅंगा•”
नया जन्म ले आऊॅंगा
(The BornFighter का सॅंकल्प) सॅंघर्ष चाहे कितना भी रहा मेरे जीवन मेंजुझता रहा कोई पाप न रखा मैंने मन मेंनासमझ था, असहज था, मैं रूऑंसा थाक्योंकि ग्रहण लग गया था मेरे बचपन में मेरी अनसुनी कहानी से लोग अंजान हैअभी गुमनाम हूॅं, मेरी न कोई पहचान हैआज भी ईमान वाला हूॅं कुछ को पता हैचाहेContinue reading “नया जन्म ले आऊॅंगा”
7 साल: इश्क़ नहीं, बर्बादी के!
7 साल पहले इत्तेफ़ाक से…मैं मिला उस नापाक से,बात हुई, मुलाक़ात हुई,और उसने इज़हार किया,हाँ, मैं भी हैरान था कि उसने इज़हार किया,मैंने हल्के मैं लिया बात को,हावी न होने दिया ज़ज्बात को… लेकिन उसने कहा,“मैं बाक़ी लड़कियों जैसी नहीं,धोखा देके छोड़ दूॅंगी ऐसी नहीं,तुम्हें मेरी वजह से कभी दुःख के ऑंसू न होंगे येContinue reading “7 साल: इश्क़ नहीं, बर्बादी के!”

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