
जो दिमाग़ी कच्चे हैं उन्हें लगता है कि हम सबको पकाते हैं
मग़र हमारी ग़ैर-हाज़िरी में वे ख़ुद हमारे बारे में बतियाते हैं
असल में हम वाहियात बातें नहीं करते उनके मनोरंजन की
वे ठण्डक देते हैं अपनी तशरीफ़ को जिसको ख़ुद जलाते हैं
जलन नाम की एक बुरी आदत होती है
किसी कमतर को हमसे नफ़रत होती है
तभी वह अक्सर हमारी बुराई करता है
वर्ना कहाॅं किसी को ऐसे फ़ुरसत होती है
जो बुराई करते हैं कौन से दूध के धुले हैं
कई दाग़ हमें भी उनके दामन में मिले हैं
ख़ुद में सुधार करते नहीं ज़रा सा कभी
बस दूसरों को देखकर पिछवाड़े जले हैं
मैंने कहीं पे पढ़ा था कि जिनमें कोई बात होती है
ग़ैर-हाज़िरी में, उन्हीं के बारे में कोई बात होती है
पहली सीख:
हर समझदार को मालूम है कि, जब कोई किसी और की बुराई उसको नीचा दिखाने के लिए आपके सामने करता है तो वह किसी और के सामने आपको भी नीचा दिखाने के लिए आपकी भी बुराई करेगा।
दूसरी सीख:
किसी भी क़ीमत पर दौलत, औरत और शौहरत की बेहद और बे-क़ाबू लालच रखने वाला कभी भी यक़ीन के लायक़ नहीं होता है, जिसके लिए व्यवहार से ज़्यादा व्यापार ज़रूरी हो वह आपको भी बेच देगा।
तीसरी सीख:
दलाली खाने वाला दलाली के लिए कुछ भी कर सकता है क्योंकि वह दलाल है और इसलिए दलाल भी यक़ीन के लायक़ नहीं होता है।
चौथी सीख:
जो अपने राज़ आपसे छुपाकर रखे और अन्य लोगों के बारे में आपको बताता रहे वह भी यक़ीन के लायक़ नहीं होता है।
पाॅंचवीं सीख:
अच्छे लोग अच्छाई करते हैं
और बुरे लोग बुराई करते हैं
